Vídeo em Hindi, publicado pelo canal KADAK.
इस सामग्री के बारे में: नीचे दिया गया सारांश, मुख्य बिंदु और विषय वीडियो की ट्रांसक्रिप्ट से स्वचालित रूप से तैयार किए गए हैं। वे वीडियो में प्रस्तुत सामग्री, राय, दावों और भविष्यवाणियों को दर्शाते हैं और All The Gate की ओर से किसी समर्थन, सत्यापन या तथ्य-जांच का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं।
वीडियो सारांश
यह वीडियो भारत के सबसे बड़े वैल्यू ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म 'Meesho' की शुरुआती असफलता से लेकर उसके एक सफल यूनिकॉर्न और पब्लिक कंपनी बनने की पूरी कहानी प्रस्तुत करता है। इसमें कंपनी के बिजनेस मॉडल, सस्ते उत्पादों के स्रोतों और वित्तीय विकास का विश्लेषण करने के साथ-साथ प्लेटफॉर्म पर आने वाले नकली सामान, विधिक मामलों, रिटर्न फ्रॉड और साइबर धोखाधड़ी की चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला गया है।
मुख्य बिंदु
- Meesho की शुरुआत 2015 में विदित आत्रे और संजीव बरनवाल द्वारा 'फैशनियर' नाम से हाइपरलोकल फैशन ऐप के रूप में हुई थी, जो बाद में रीसेलिंग और वैल्यू ई-कॉमर्स मॉडल में बदल गई।
- कंपनी के विकास के पीछे मुख्य तीन स्तंभ काम करते हैं: अनब्रांडेड सप्लाई, 0% कमीशन पॉलिसी, और स्वयं का लॉजिस्टिक्स नेटवर्क 'Valmo'।
- वित्तीय वर्ष 2026 तक Meesho का परिचालन राजस्व बढ़कर 12,626 करोड़ रुपये हो गया और इसके आईपीओ को 79.02% सब्सक्रिप्शन मिला, जिससे इसका मार्केट कैप 98,000 करोड़ रुपये को पार कर गया।
- दिल्ली हाईकोर्ट और केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने Meesho पर नकली सनस्क्रीन, बिना वैज्ञानिक अस्तित्व वाले रासायनिक उत्पाद और नकली जॉकी उत्पादों की बिक्री को लेकर सख्त कार्रवाई और निर्देश जारी किए।
- प्लेटफॉर्म पर कैश ऑन डिलीवरी (COD) के कारण होने वाले रिटर्न फ्रॉड और छोटे सेलर्स व ग्राहकों को आने वाली धोखाधड़ी की समस्याओं को वीडियो में विस्तार से बताया गया है।
विषय
ई-कॉमर्सवैल्यू ई-कॉमर्सरीसेलिंग मॉडललॉजिस्टिक्सआईपीओनियामक कार्रवाईनकली उत्पादसाइबर धोखाधड़ी
पढ़ने का समय: लगभग 3 मिनट · वीडियो की अवधि: 20:24
इस हिस्से में क्या है
30 सेकंड में
- वीडियो के मुताबिक Meesho के तीन स्तंभ हैं: बिना ब्रांड वाली सप्लाई, सेलर्स से 0% कमीशन और अपना लॉजिस्टिक्स नेटवर्क Valmo।
- शुरुआत दिसंबर 2015 में बेंगलुरु से एक हाइपरलोकल फैशन ऐप के रूप में हुई थी।
- वीडियो दिल्ली हाईकोर्ट और CCPA के मामलों के ज़रिए नकली उत्पादों की समस्या भी दिखाता है।
यह कहानी आपके लिए क्यों मायने रखती है
₹150 की कुर्ती और ₹99 का किचन सेट बिना डिलीवरी चार्ज के कैसे बिक जाता है? KADAK के इस एपिसोड में Meesho की पूरी कहानी है: एक छोटे फैशन ऐप से लेकर शेयर बाज़ार तक, और साथ में नकली सामान, रिटर्न फ्रॉड और साइबर धोखाधड़ी जैसी चुनौतियां भी।
All The Gate की राय (यह तथ्य नहीं, हमारी व्याख्या है)
यह हमारी व्याख्या है, तथ्य नहीं। भारत में Meesho की कहानी बताती है कि छोटे शहरों का ग्राहक कीमत को सबसे ऊपर रखता है, और ज़ीरो कमीशन मॉडल ने लाखों छोटे दुकानदारों के लिए ऑनलाइन बिक्री का रास्ता खोला है। लेकिन यही खुलापन भरोसे की कीमत पर आता है: जब इतने सारे सेलर्स एक जैसा सामान बेचते हैं, तो नकली उत्पाद और कैश ऑन डिलीवरी से जुड़े रिटर्न फ्रॉड पूरे प्लेटफॉर्म की साख पर असर डालते हैं। नए सेलर के लिए सबक यह है कि सस्ती कीमत के साथ असली प्रोडक्ट, साफ़ फोटो और समय पर डिलीवरी ही लंबे समय तक टिकने का तरीका है। मुफ्त या पेड: ग्राहक के लिए ऐप डाउनलोड करना मुफ्त है; सेलर्स के लिए 0% कमीशन का दावा वीडियो में किया गया है, लेकिन Meesho की आधिकारिक वेबसाइट हमारे लिए नहीं खुली, इसलिए फीस की शर्तें प्लेटफॉर्म पर खुद जांच लें (01/11/2026 को देखा गया; बदल सकता है)।
जिन बातों की जांच की जा सकती है
- Wikipedia (अंग्रेज़ी): Meesho: कंपनी की स्थापना दिसंबर 2015 में विदित आत्रे और संजीव बरनवाल ने की थी, इसका मुख्यालय बेंगलुरु में है, और यह दिसंबर 2025 में IPO के ज़रिए 603 मिलियन डॉलर जुटाकर BSE और NSE पर लिस्ट हुई।
- वही Wikipedia लेख: 2024 में Meesho ने Valmo नाम का लॉजिस्टिक्स मार्केटप्लेस शुरू किया, जो कई डिलीवरी कंपनियों को जोड़कर सेलर्स को शिपिंग सेवा देता है; रिपोर्ट्स के अनुसार यह करीब 15,000 पिनकोड में काम करता है।
- वही Wikipedia लेख: 2023 में Meesho 50 करोड़ (500 मिलियन) से ज़्यादा डाउनलोड पार करने वाला सबसे तेज़ शॉपिंग ऐप बना।
भारतीय ई-कॉमर्स पर और पढ़ें
आप क्या सोचते हैं?
वीडियो की शुरुआत Sun Pharma के उस केस से होती है जिसमें कंपनी कहती है कि वह Meesho पर कुछ बेचती ही नहीं, फिर भी उसके नाम से नकली सनस्क्रीन बिक रही थी। क्या आपको कभी किसी ऐप से नकली या अलग सामान मिला है? आपने क्या किया? कमेंट में बताइए और यह पोस्ट उन दोस्तों के साथ शेयर कीजिए जो ऑनलाइन सस्ता सामान खरीदते हैं।
यह सारांश AI की मदद से तैयार किया गया है और इंसानों ने इसकी समीक्षा की है।
वीडियो का ट्रांसक्रिप्ट
उपलब्ध कैप्शन का पाठ; इसमें त्रुटियाँ हो सकती हैं।
अगस्त 2026 देश की सबसे बड़ी दवा कंपनी Sun Farma अचानक दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच जाती है। अदालत के सामने वह ऐसी बात रखती है जिसे सुनकर हर कोई हैरान रह जाता है। Sun Farma कहती है कि हम Meesho ऐप पर अपना एक भी प्रोडक्ट नहीं बेचते। लेकिन फिर भी वहां हमारे नाम से नकली सनस्क्रीन बेची जा रही है। यह मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि कुछ ही हफ्तों बाद सरकार का उपभोक्ता विभाग यानी सीसीपीए एक और बड़ा खुलासा करता है। पता चलता है कि Meesho पर किसानों को खरपतवार मारने के नाम पर ऐसा जहरीला केमिकल बेचा जा रहा है जिसका दुनिया के किसी भी वैज्ञानिक या कानूनी रिकॉर्ड में कोई वजूद नहीं है। यानी पूरी तरह से काल्पनिक जहर। अब जरा रुकिए और सिक्के का दूसरा पहलू देखिए। एक तरफ सिर्फ ₹150 की कुर्ती और ₹99 का किचन सेट बिना किसी डिलीवरी चार्ज के करोड़ों घरों तक पहुंच रहा है। कंपनी साल में 12,626 करोड़ का रेवेन्यू कमा रही है। उसका आईपीओ 79 गुना सब्सक्राइब होता है और कंपनी का मार्केट कैप 98,000 करोड़ के पार निकल जाता है। लेकिन दूसरी तरफ उसी प्लेटफार्म पर नकली जॉकी अंडरवेयर से लेकर गैरकानूनी वॉकी टॉकी तेजाब और करोड़ों के रिटर्न फ्रॉड का खेल चल रहा है। मैं बात कर रही हूं भारत के सबसे बड़े वैल्यू ई-कॉमर्स प्लेटफार्म Meesho की। आखिर कैसे एक डूबते हुए स्टार्टअप ने Amazon और Flipkart की नाक के नीचे से छोटे शहरों का बाजार छीन डाला। इतना सस्ता सामान आखिर आता कहां से है? और कैसे सस्ते सामान की इसी दौड़ ने भारत में नकली प्रोडक्ट और फेक शॉपिंग वेबसाइट्स का मायाजाल खड़ा कर दिया है। मैं हूं गरिमा। आज की अनकही में इसी पर बात होगी। लेकिन एपिसोड शुरू करने से पहले नीचे जॉइ बटन पर क्लिक करके कड़क की मेंबरशिप जरूर ले लीजिए ताकि हमारा सुपर एक्सक्लूसिव कंटेंट मिस ना हो जाए और आप उसे सबसे पहले देख सकें। अनकही का लेटेस्ट एपिसोड आप सोमवार से शुक्रवार शाम 7:45 पर देख सकते हैं। अब चलते हैं वहां जहां से यह पूरी कहानी शुरू हुई थी। बात है साल 2012 की। दो दोस्तों विदित आत्रे और संजीव बरनवाल ने आईआईटी दिल्ली से बीटेक की डिग्री ली। इसके बाद विदित ने आईटीc लिमिटेड में ऑपरेशंस का काम देखा। जबकि संजीव ने जापान में Sony कॉरपोरेशन और Sony मोबाइल के साथ 2 साल से ज्यादा वक्त तक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर मोबाइल आर्किटेक्चर और कोडिंग की बारीकियां सीखी। आम भारतीय ग्राहकों के लिए एक टेक्नोलॉजी कंपनी बनाने के सपने के साथ 2015 में दोनों दोस्तों ने बेंगलुरु में फिर से हाथ मिलाया। दिसंबर 2015 में दोनों ने फैशनर नाम से एक हाइपर लोकल फैशन ऐप ल्च किया। आईडिया फूड डिलीवरी की तर्ज पर कपड़ों की डिलीवरी करने का था। यानी ग्राहक अपने घर के पास की लोकल दुकान या बुटीक से ऐप पर कपड़े चुने। 1 घंटे के अंदर डिलीवरी बॉय घर आकर ट्रायल कराए और जो पसंद आए ग्राहक उसे रख ले। इस आईडिया के दम पर 2016 में उन्हें अमेरिका के मशहूर स्टार्टअप प्रोग्राम वाई कॉम्बिनेटर वाई सीs6 में जगह मिल गई और ₹1 करोड़ की शुरुआती सीड फंडिंग भी मिली। लेकिन महज 6 महीने के अंदर यह मॉडल पूरी तरह फेल हो गया। लोकल बुटीक मालिक टेक्नोलॉजी चलाने में सहज नहीं थे। बार-बार कैटलॉग अपडेट करना उनके बस की बात नहीं थी और नए ग्राहकों को जोड़ने का खर्च इतना ज्यादा था कि हर आर्डर पर नुकसान हो रहा था। 2016 के आखिर तक कंपनी के बैंक खाते में सिर्फ 3 महीने का पैसा बचा था और टीम 12 लोगों से घटकर सिर्फ चार लोगों की रह गई थी। कंपनी बंद होने की कगार पर थी। इसलिए दोनों फाउंडर्स ने सस्ते ऑफिस में शिफ्ट होकर अपनी सैलरी में कटौती की और खुद जमीन पर उतर कर दुकानदारों, बुटीक चलाने वाली महिलाओं से बात करना शुरू कर दिया। इस रिसर्च के दौरान उन्होंने गुजरात और दूसरे राज्यों में अनोखा पैटर्न देखा। ज्यादातर यूज़र्स जिन पर वो सर्वे कर रहे थे, सामान्य खरीदार नहीं बल्कि घर से बुटीक चलाने वाली महिलाएं थी। जो कपड़ा मंडियों के होलसेलर्स के नंबर जुटाती थी। उनसे WhatsApp पर कपड़ों की तस्वीरें मंगवाती थी। फिर थोड़ा मुनाफा जोड़कर WhatsApp ग्रुप्स और Facebook पर लोगों को बेच देती थी। फाउंडर्स को समझ आ गया कि भारत के छोटे शहरों में लोग किसी अनजान वेबसाइट के बजाय पहचान वाले इंसान के भरोसे पर खरीददारी करना पसंद करते हैं। यहीं से फैशनियर को बंद करके Meesho यानी मेरी शॉप का जन्म हुआ। मकसद था बिना ₹1 निवेश किए किसी भी इंसान को ऑनलाइन दुकानदार यानी रिसेलर बनाना। इसमें काम करता है बी टू बी टू सी यानी बिजनेस टू बिजनेस टू कंज्यूमर मॉडल। ऐसा बिजनेस मॉडल है जहां कोई कंपनी सीधे ग्राहक को सामान बेचने के बजाय किसी दूसरी कंपनी के जरिए ग्राहक तक पहुंचती है। संजीव रात में कोडिंग करते और दिन में रिसेलर की जरूरत के हिसाब से ऐप में फीचर्स जुड़वाते। साथ ही कस्टमर सपोर्ट कॉल्स भी खुद ही संभालते थे। शुरू में उन्होंने दो मॉडल साथ चलाए। लेकिन जब देखा कि उनका मार्केट प्लेस मॉडल Meesho सप्लाई हर महीने दोगुनी रफ्तार से बढ़ रहा है तो जून 2017 में उन्होंने पूरा ध्यान मैनेज्ड मार्केट प्लेस पर लगाने का फैसला किया। इस मॉडल ने घरेलू महिलाओं को आमदनी का जरिया दिया और माउथ पब्लिसिटी से यूज़र्स अपने आप बढ़ने लगे। प्रीसेलिंग मॉडल की कामयाबी के बाद इन्वेस्टर्स का भरोसा भी बढ़ा। 2017 में कंपनी ने एलिवेशन कैपिटल और बाय कॉम्बिनेटर से $3.4 मिलियन जुटाई। 2018 में सिकवाया कैपिटल के आने पर सीरीज बी में $1.5 मिलियन और नवंबर 2018 में $ मिलियन मिले। जिसके बाद Meesho ने किचन, होम गुड्स और इलेक्ट्रॉनिक्स में कदम रखा। जून 2019 में मेटा और नेस्पर्स के नेतृत्व में कंपनी ने 125 मिलियन जुटाए जो किसी भी भारतीय स्टार्टअप में Facebook का पहला निवेश था और अप्रैल 2021 में सॉफ्ट बैंक से $300 मिलियन और सितंबर 2021 में 570 मिलियन का निवेश मिला। इसके साथ Meesho भारत की पहली सोशल कॉमर्स यूनिकॉर्न बन गई। तब 18 लाख रिसेलर्स और 1 लाख सप्लायर्स के साथ यह दुनिया में सबसे ज्यादा डाउनलोड की जाने वाली ई-कॉमर्स ऐप भी बन गई। फिर सस्ते इंटरनेट और यूपीआई के गांव-गांव तक फैलने से बाजार का गणित बदल गया। जो ग्राहक पहले रिसेलर्स के जरिए सामान मंगवाते थे, वह अब सस्ते दाम देखकर सीधे Meesho ऐप से खरीददारी करने लगे। इसलिए Meesho ने भी अपना मॉडल बदल दिया। यानी प्लेटफार्म को सिर्फ रिसेलर्स तक सीमित रखने के बजाय सीधे आम ग्राहकों यानी बी टू सी मार्केट प्लेस के लिए खोल दिया। अब सवाल उठता है कि जो सामान बाजार में ₹500 का मिलता है वो Meesho पर ₹180 में बिना किसी डिलीवरी चार्ज के कैसे मिल जाता है? इसके पीछे Meesho के तीन मजबूत पिलर्स काम करते हैं। पहला है अनब्रांडेड सप्लाई। Meesho पर बिकने वाला ज्यादातर सामान ब्रांड्स का नहीं बल्कि सूरत, जयपुर और देश के दूसरे थोक बाजारों के अनब्रांडेड प्रोडक्ट्स होते हैं। Meesho ने सप्लाई चेन के सारे बिचोलियों को हटाकर सीधे छोटे मैन्युफैक्चरर्स को ऐप से जोड़ दिया। जिन छोटे व्यापारियों के पास रेगुलर जीएसटी नहीं है या जो कंपोजिशन जीएसटी में आते हैं, Meesho उन्हें भी बिना ब्रांडिंग वाली स्टैंडर्ड पैकेजिंग में सामान बेचने की छूट देता है। जिससे लागत मिनिमम रहती है। दूसरा पिलर है 0% कमीशन पॉलिसी। दूसरे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर भारी कमीशन की वजह से दुकानदार सामान की कीमत बढ़ा देते हैं। इसके उलट Meesho ने सभी कैटेगरीज में दुकानदारों से कमीशन लेना पूरी तरह से खत्म कर दिया है। इसी वजह से प्लेटफार्म पर 15 लाख से ज्यादा एक्टिव सप्लायर्स जुड़े हैं। तीसरा पिलर है लॉजिस्टिक्स और एडवरटाइजिंग मॉडल। ऐप पर ग्राहक को जो फ्री डिलीवरी दिखती है वह असल में मुफ्त नहीं होती है। Meesho शिपिंग फीस दुकानदार से वसूलता है और दुकानदार उस खर्च को पहले से ही सामान के प्राइसेस में जोड़ लेता है। शिपिंग खर्च को कम करने के लिए Meesho ने खुद का एसेट लाइट लॉजिस्टिक्स नेटवर्क वेल यानी वैल्यू प्लस मूवमेंट खड़ा किया। इसका सॉफ्टवेयर देश भर के रीजनल कूरियर एजेंट्स, ट्रांसपोर्टर्स और शैडो फैक्स जैसी थर्ड पार्टी कंपनीज के बीच तालमेल कराता है। 2025 में शैडो फैक्स के कुल रेवेन्यू में Meesho और Flipkart की संयुक्त हिस्सेदारी करीब 74.5% रही। जनवरी 2026 में Meesho ने Valmo ट्रांसपोर्टेशन नाम से फ्री होल्ड वाली सब्सिडरी कंपनी भी शुरू की। कमाई के दूसरे इंजन के रूप में Meesho एड्स काम करता है। जब 15 लाख दुकानदार एक जैसा सामान बेचते हैं तो सर्च में ऊपर दिखने के लिए वो Meesho के कॉस्ट पर क्लिक एडवरटाइजिंग प्लेटफार्म पर पैसा खर्च करते हैं। कस्टमर्स और ऑर्डर्स के पैमाने पर Meesho आज भारत का सबसे बड़ा वैल्यू ई-कॉमर्स प्लेटफार्म बन चुका है। 2023 में टाइम मैगजीन ने इसे दुनिया की सबसे प्रभावशाली कंपनियों में शामिल किया था। फाइनेंसियल ईयर 2026 तक Meesho पर 26 करोड़ 40 लाख यूज़र्स जुड़ चुके हैं और कंपनी सालाना 267 करोड़ ऑर्डर्स डिलीवर कर रही है। इनमें से करीब 80% ऑर्डर टिए टू और छोटे शहरों से आते हैं। अक्टूबर 2026 की फेस्टिव सेल के पहले ही दिन Meesho के ऑर्डर्स में पिछली साल की तुलना में 75% का भारी उछाल देखने को मिला। कंपनी का फाइनेंसियल डाटा बताता है कि उसने कैश बर्न के दौर से निकलकर मजबूत पकड़ बनाई है। फाइनेंसियल ईयर 2023 में Meesho का ऑपरेशनल रेवेन्यू ₹5734 करोड़ 52 लाख था और शुद्ध घाटा ₹1671 करोड़ 90 लाख रहा। फाइनेंसियल ईयर 204 में मार्केटिंग खर्च कंट्रोल करने से रेवेन्यू बढ़कर 7615 करोड़ 15 लाख पहुंचा और घाटा 80% कम होकर ₹304 करोड़ 90 लाख रह गया। फाइनेंसियल ईयर 2025 में ऑपरेशनल रेवेन्यू 23% बढ़कर ₹9389 करोड़ 90 लाख हुआ। लेकिन इस दौरान कागजों पर घाटा दिखा ₹3941 करोड़ 71 लाख जो व्यापारिक नुकसान नहीं था बल्कि आईपीओ से पहले विदेशी होल्डिंग्स को भारत में लाने यानी रिवर्स फ्लिप की प्रोसेस में चुकाए गए ₹2400 करोड़ से ज्यादा के टैक्स के कारण बैलेंस शीट पर दिखा था। इसके बाद फाइनेंसियल ईयर 2026 में ऑपरेशनल रेवेन्यू 34.5% की छलांग लगाकर ₹12,626 करोड़ हो गया। जबकि सालाना घाटा ₹1358 करोड़ पर आ गया। आईपीओ से पहले कंपनी ने ऑफिशियल नाम फैशनियर टेक्नोलॉजीes प्राइवेट लिमिटेड से बदलकर Meesho लिमिटेड कर दिया। जिसका मकसद था निवेशकों और आम जनता के बीच कॉर्पोरेट नाम और ब्रांड नेम को लेकर होने वाले भ्रम को दूर करना। 3 से 5 दिसंबर 2025 के बीच कंपनी ने ₹5421 करोड़ 20 लाख का आईपीओ पेश किया। इसमें 4250 करोड़ के 38 करोड़ 29 लाख फ्रेश शेयर इशू हुए और 10171 करोड़ 20 लाख का ओएफएस यानी ऑफर फॉर सेल रखा गया। आईपीओ को जबरदस्त रिस्पांस मिला और यह 79.02% सब्सक्राइब हुआ। इसके बाद दोनों फाउंडर्स का जॉइंट प्रमोटर्स स्टेक 18.51% से घटकर 14.6% रह गया। लेकिन जिस ओपन मार्केट प्लेस मॉडल ने Meesho को इतनी तेज रफ्तार दी उसी फ्लेक्सिबिलिटी ने प्लेटफार्म पर नकली सामान और विवादों का अंबार लगा दिया। अगस्त 2026 में जब सन फार्मा ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि Meesho पर बिना किसी ऑथोराइज्ड सप्लाई के उनके नाम से नकली सनस्क्रीन बिक रहा है तो कोर्ट ने तुरंत अंतरिम आदेश पास कर सभी नकली लिस्टिंग्स हटाने का निर्देश दिया। इसी तरह जून और अगस्त 2026 में जॉकी के मामलों में दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। कंपनी ने बताया कि Meesho पर ना सिर्फ नकली जॉकी प्रोडक्ट्स बिक रहे हैं बल्कि जॉय की जैसे मिलते जुलते नामों से कस्टमर्स को ठगा जा रहा है। कोर्ट ने Meesho को 36 घंटे में सभी विवादित यूआरएल ब्लॉक करने और चार हफ्ते में आरोपी सेलर्स केवाईसी पते और मोबाइल नंबर, यूपीआई डिटेल्स, ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड्स और आईपी लॉग सौंपने का आदेश दे दिया। बड़े ब्रांड्स के अलावा सितंबर 2023 में Meesho के ही एक सेलर ने शिकायत की थी कि दूसरे दुकानदार उसके डिजाइन किए कपड़ों की तस्वीरें कॉपी करके कस्टमर्स को घटिया क्वालिटी के प्रोडक्ट्स भेज रहे हैं। जिस पर दिल्ली हाईकोर्ट ने Meesho की सभी दलीलें खारिज कर दी और नकलची सेलर्स का बकाया भुगतान रोकने के साथ-साथ उनकी जीएसटी और बिक्री की जानकारी पब्लिक करने का आदेश दिया। उधर सीसीपीए यानी सेंट्रल कस्टमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी ने भी Meesho पर कई बड़ी कार्यवाहयां की। फरवरी 2026 में कृषि मंत्रालय की शिकायत पर सीसीपीए ने पाया कि Meesho पर किसानों को साइक्लोसिनोन हर्बीसाइड ग्रन्यूल्स 5% एक्टिव इंग्रेडिएंट नाम का खरपतवार नाशक बेचा जा रहा था। जिसका किसी भी कानूनी या वैज्ञानिक रिकॉर्ड में अस्तित्व ही नहीं है। MSHO ने खुद यह माना कि किसी धोखेबाज सेलर का बनाया गया काल्पनिक प्रोडक्ट था यह। इस पर सीसीपीए ने MSHO की बिचोलिया दलील को खारिज करते हुए कहा कि सिर्फ सेलर के सेल्फ डिक्लेरेशन फॉर्म पर भरोसा करना ऑनबोर्डिंग प्रोसेस में घोर लापरवाही है। इससे पहले दिसंबर 2025 में सीसीपीए ने बिना सरकारी मंजूरी के वॉकी टॉकी बेचने पर Meesho के खिलाफ आदेश पारित किया था। जांच में पता चला कि अकेले एक सेलर ने ऐसे गैर कानानूनी वॉकी टॉकीज़ बेचे थे और दूसरे सेलर्स का आंकड़ा कंपनी दे ही नहीं पाई। सीसीपीए ने Meesho पर भारी जुर्माना लगाया। अदालतों से अलग रोजमर्रा के कामकाज में दुकानदारों और खरीदारों दोनों को धोखाधड़ी झेलनी पड़ती है। टिए टू और टिए थ्री बाजारों में ज्यादातर ऑर्डर सीओडी यानी कैश ऑन डिलीवरी पर होते हैं। जहां 20 से 40% तक सामान बिना डिलीवर हुए वापस लौट आता है। इसका आने जाने का खर्च दुकानदार को ही सहना पड़ता है। ऊपर से कई धोखेबाज खरीददार नई कुर्ती या साड़ी निकालकर उसकी जगह पुराना कपड़ा या खाली पॉली बैग वापस भेज देते हैं। गोदाम का सीसीटीवी यह साबित नहीं कर पाता कि किस ऑर्डर आईडी के पैकेट में कौन सा आइटम डाला गया था। इसलिए दुकानदार मैनुअल क्लेम में हार जाते हैं। जयपुर से रोजाना 250 ऑर्डर्स भेजने वाली सेलर प्रिया को इसी रिटर्न फ्रॉड से हर महीने करीब ₹85,000 का नुकसान हो रहा था। बाद में जब उन्होंने ऑर्डर लिंक्ड पैकिंग वीडियो सिस्टम बनाया जिसमें पैकिंग के वक्त हर पार्सल का वीडियो उसके ऑर्डर आईडी और एडब्ल्यूबी नंबर के साथ अपने आप टैग हो जाता है। तब जाकर उनके क्लेम की रिकवरी शुरू हुई। दूसरी ओर आम ग्राहक भी परेशान हैं। चोरी की तस्वीरों से घटिया सामान भेजने के अलावा कई डिलीवरी एजेंट टारगेट पूरे करने या सामान हड़पने के लिए पार्सल दिए बिना ही सिस्टम में डिलीवर्ड मार्क कर देते हैं। और जब ग्राहक गलत सामान मिलने पर रिफंड मांगते हैं तो कई बार सस्िशियस एक्टिविटी के नाम पर ग्राहक का अकाउंट ही सस्पेंड कर दिया जाता है। जिससे वह अपनी ऑर्डर हिस्ट्री और फंसा हुआ रिफंड तक नहीं देख पाता। ऊपर से ई-कॉमर्स के बढ़ते बाजार का फायदा उठाकर साइबर अपराधियों ने फेक वेबसाइट्स का जाल भी बिछा दिया है। यह समस्या इतनी गंभीर है कि खुद msho को अपनी ब्रांड पहचान चुराने वाली फेक वेबसाइट्स के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट से परमानेंट इंजंक्शन लेनी पड़ी थी। हाल के कुछ सालों में पुलिस की साइबर सेल ने देश भर में कई बड़े गिरोह पकड़े हैं। ऐसे ही एक मामले में दिल्ली पुलिस ने विजय अरोड़ा और उसके चार साथियों को गिरफ्तार किया। जिन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स और कपड़ों की 60 बोगस वेबसाइट्स बनाई थी। एसइओ तकनीक से वह इन्हें Google सर्च में सबसे ऊपर दिखाते थे और 3 साल में 10,000 से ज्यादा लोगों से ₹25 करोड़ ठग चुके थे। साइबर एक्सपर्ट्स ने fab इंडिया. क्लब just cotton perfect एक्स.in और विजिट.com जैसी स्कैम साइट्स को मार्क किया है जो fब इंडिया व्स कन्वर्स और कैट इंडिया के नाम पर फर्जी स्टोर्स चलाती हैं। साथ ही शॉप क्लूस पर भी सावधानी की सलाह दी गई है। वहीं दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने रवि अरोड़ा और दिनेश शर्मा को ₹60 लाख के घोटाले में गिरफ्तार किया। जिन्होंने अग्रवाल एंड ss.co.in hind solutशंस.in बंसल ट्रेडers.com और sunsolar.com बनाकर h microsoft godderज प्रॉपर्टीज मदर डेरी Amazon और Bajaj Finance के नाम पर पैसे वसूले और कभी सामान ही नहीं भेजा। इसके अलावा दिल्ली पुलिस ने ऑपरेशन सीवाई हॉक चलाकर इंटरstate सिंडिकेट का पर्दाफाश किया जो रिटर्न पॉलिसी की खामियों और किराए के बैंक खातों का इस्तेमाल करता था। यह गैंग डिलीवरी ऐप हैक कर रास्ते में ही महंगे पार्सल्स की लोकेशन बदलकर चोरी करता था। इन फेक वेबसाइट्स का काम करने का तरीका इतना जबरदस्त होता है कि कोई जल्दी पकड़ ही नहीं सकता। सबसे पहले ठग असली ब्रांड्स से मिलते-जुलते लुक अलाइक डोमेनस बनाते हैं। जैसे ब्रांड्स के आगे एक्स वजी यापी जोड़ देना। इतना ही नहीं ठग HTTPS और हरे वाले पैडलॉक वाला सुरक्षा सर्टिफिकेट लगा देते हैं। Facebook और Instagram पर स्पों्सर्ड एड्स चलाकर जब ग्राहक को साइट पर लाया जाता है तो वहां फ्लैट 90% ऑफ और ओनली टू पीसेस लेफ्ट का फर्जी टाइमर दिखाकर तुरंत खरीदने का प्रेशर बनाया जाता है। भरोसा दिलाने के लिए ठग एआई से सैकड़ों नकली फाइव स्टार रिव्यूज लिखवाते हैं और मशहूर इन्फ्लुएंसर्स के डीप फेक वीडियोस बनाकर प्रोडक्ट की तारीफ दिखाते हैं। ऑर्डर करते वक्त ऐसी साइट सीओडी बंद कर देती हैं और यूपीआई या कार्ड से पूरा एडवांस पेमेंट मांगती हैं। जैसे मंगलुरु में श्री गणेश इलेक्ट्रॉनिक्स के नाम पर एक शख्स ने ₹16160 ठग लिए। पैसे लेने के बाद ठग महंगे मोबाइल या घड़ी के बदले ग्राहक के पते पर ₹20 का कोई प्लास्टिक का खिलौना या रद्दी कपड़ा भेज देते हैं। इसका मकसद कूरियर कंपनी के सिस्टम में डिलीवर का स्टेटस जनरेट करना होता है ताकि जब कस्टमर अपने बैंक में पैसे वापस लेने के लिए चार्ज बैग दर्ज करें तो ठग डिलीवरी का सबूत दिखाकर ग्राहक के दावे को कमजोर कर सके। इसके अलावा WhatsApp पर आपका पार्सल अटक गया है। पता अपडेट करने के लिए ₹5 का भुगतान करें। जैसे फर्जी कूरियर फिशिंग लिंक्स भेजकर भी यूपीआई पिन चुराए जाते हैं। इस धोखाधड़ी से बचने के लिए हर खरीददार को अनबॉक्सिंग वीडियो का नियम जरूर अपनाना चाहिए। पार्सल खोलने से पहले फोन से बिना कट का लगातार वीडियो बनाना चाहिए। शुरुआत में बंद पैकेट के सभी तरफ के हिस्सों को साफ दिखाना चाहिए ताकि साबित हो सके कि पैकेट से छेड़छाड़ नहीं हुई है। फिर शिपिंग लेवल पर लिखे ऑर्डर आईडी और एडब्ल्यूबी ट्रैकिंग नंबर पर कैमरा ज़ूम करके पैकेट खोलें। यह वीडियो ऐप हेल्प सेंटर से लेकर कंज्यूमर कोर्ट तक सभी जगह सबूत का काम करता है। साथ ही किसी भी नई वेबसाइट के कांटेक्ट अस पेज पर उसका एड्रेस, वैलिड जीएसटी नंबर और हेल्पलाइन नंबर जरूर जांचें। पर्सनल नंबर्स पर सीधे यूपीआई ना करें और पेमेंट करते वक्त आरबीआई के आधिकारिक bank.in डोमेन की जांच करें। अगर फिर भी आपके साथ ऑनलाइन ठगी हो जाए तो पहले 24 घंटे सबसे अहम होते हैं। फर्जी वेबसाइट या फिशिंग लिंक से पैसे कटने पर सबसे पहले टोल फ्री नंबर 1930 पर कॉल करें। गृह मंत्रालय का यह सिस्टम रियल टाइम में ठग के बैंक खाते को फ्रीज़ कर देता है। इसके बाद साइबर क्राइम.gov.in पर जाकर रिपोर्ट अदर साइबर क्राइम में वेबसाइट का यूआरएल, पेमेंट प्रूफ और चैट के स्क्रीनशॉट्स अपलोड करें। साथ ही अपने बैंक या पेमेंट ऐप में तुरंत लिखित चार्ज बैक की मांग करें। वहीं Meesho जैसी कंपनी से रिफंड विवाद होने पर क्वरी@ Mesho.com और एक्स हैंडल Meesho अंडरs ऑफिशियल के साथ-साथ जागो ग्राहक जागो पर शिकायत भेजें। इसके बाद नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन नंबर 1915 या WhatsApp नंबर80001915 पर अनबॉक्सिंग वीडियो और बिल के साथ डॉकेट दर्ज करें। जिस पर कंपनी को 30 दिन में जवाब देना मैंडेटरी है। यदि कहीं से स्यूशन ना मिले तो आप india.gov.in के ई दाखिल पोर्टल के जरिए बिना वकील किए घर बैठे डिजिटल कंज्यूमर कोर्ट में केस दायर कर सकते हैं। बस ध्यान रहे कि कानूनी नोटिस और केस में सेलर को पहला विपक्षी और MSHO को दूसरा विपक्षी बनाएं ताकि दोनों एक दूसरे पर जिम्मेदारी ना टाल सकें। केस जीतने पर रिफंड के साथ 9 से 12% ब्याज और ₹000 से ₹00 तक का मुआवजा मिलता है। एक असफल ऐप से निकलकर 26 करोड़ 40 लाख ग्राहकों और 98000 करोड़ से ज्यादा के मार्केट कैप वाली पब्लिक कंपनी बनने तक Meesho का सफर भारतीय स्टार्टअप इतिहास की असाधारण मिसाल है। लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट और सीसीपीए की सख्ती के बाद यह साफ हो चुका है कि कोई भी मार्केट प्लेस खुद को सिर्फ बिचौलिया बताकर कानूनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता। आने वाले सालों में Meesho की कामयाबी इस बात पर डिपेंड करेगी कि वह अपने क्लाउड और एआई इन्वेस्ट का इस्तेमाल सिर्फ ऑर्डर्स बढ़ाने में करता है या फर्जी सेलर्स और रिटर्न फ्रॉड को रोकने में भी उतनी ही सख्ती दिखाता है। आज के अनकही में इतना ही।
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Assuntos: E-commerce, Plataformas e marketplaces, Marketing e SEO, Logística e pagamentos. Publicado no YouTube em 2026-10-27.
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